मछली पालन कैसे करे क्या-क्या जरूरी होता है
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छली का बीज [जीरा]
तालाब का निर्माण
पूंजी
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मछली पालन की संपूर्ण जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिलेगी
मछली पालन के लिए तालाब का निर्माण कैसे और कैसा करे -
बहुत से लोगो का यह सवाल होता है कि मछली पालन करने के लिए तालाब किस जगह पर बनाये और उसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई कितनी रखे । अगर आपको नहीं पता है तो इन बातों को जानले तालाब बनवाने के लिए हमें निम्नलिखित बातों ध्यान मे रखनी चाहिए।
तालाब घर के आस पास हो तो बहुत अच्छा होगा । जिससे आप उसकी देख-भाल आसानी से कर सकते हैं।
तालाब बनवाने के लिए आपको समतल जमीन का चयन करना होगा। यदि जमीन ऊंचाई पर रहेगी तो तालाब का पानी जल्दी से सूखने लगेगा। तालाब के लिए समतल जमीन का ही चयन करे।
बहुत ज्यादा नीची जगह का चयन ना करे । नहीं तो बरसात के समय तालाब में पानी भर जाएगा। जिससे मछलियां तालाब से बाहर जाने का खतरा रहता है।
तालाब खुली जगह पर होना चाहिए। जिसके नजदीक कोई बड़ा पेड़ न हो जिससे तालाब के तल तक धूप पहुच सके।
तालाब के पास कोई पानी का साधन है तो बहुत अच्छा होगा । जिससे आवश्यकता के समय तालाब में पानी भरा जा सकता है। ऐसा नहीं है और तालाब वर्षा पर निर्भर होता है।
चिकनी मिट्टी वाले जमीन तालाब के निर्माण के लिए अच्छा है। तालाब बनवाते समय पानी के निकास और प्रवेश मार्ग की व्यवस्था का भी ध्यान रखे।
कुल जमीन का 30 से 35 प्रतिशत भाग डैम बनाने में उपयोग हो जाता है। जैसे- माना की आप 0.5 एकड़ मे तालाब बनवाना चाहते हो और इसके लिए आपके पास 0.75 एकड़ की जमीन होनी आवश्यक है।
तालाब की लंबाई और चौड़ाई कितनी रखनी चाहिए-
तालाब की लंबाई उसकी तालाब चौड़ाई की 3 गुनी होनी चाहिए। अनुपात में देखा पर तो लंबाई और चौड़ाई के अनुपात 3:1 मे होना चाहिए।
मछली पालन के लिए तालाब की गहराई कितनी रखे -
तालाब का जो वातावरण होता है वह तालाब की गहराई पर निर्भर करता है। इसलिए तालाब बनवाते समय इस बात का ध्यान रखे कि गहराई उतनी रखनी होगी जिससे सूर्य की रोशनी तालाब के तल तक पहुंच आसानी से पहुच सके। ज्यादा गहरा तालाब होने पर ऑक्सीजन का अभाव हो जाता है है जिससे तालाब से विषैली गैस उत्पन्न होने लगती है।
तालाब पर बांध कैसा रखे-
बांध की ऊंचाई भूमि से 1 से 1.5 मीटर होनी चाहिए। बांध की ऊंचाई तालाब से जितनी कम होगी तो तालाब के पानी का हवा से सम्पर्क उतना ही अच्छा रहेगा और तालाब पानी में ऑक्सीजन की उपलब्धता अच्छी रहेगी। बांध की ऊपरी समतल सतह चौड़ाई कम से कम 3 मीटर की होनी चाहिए। नीचे की चौड़ाई 4 से 5 मीटर होनी चाहिए। बांध की ढलान तालाब की ओर थोड़ी कम होना चाहिए ताकि मिट्टी कट कर तालाब से बाहर न जा पाए। आपको आने जाने मे आसानी होगी। बांध से बाहर की तरफ आपको ढलान को ज्यादा रख सकते है।
तालाब में पानी की व्यवस्था-
तालाब में पानी लाने के लिए प्रवेश पाइप की व्यवस्था करनी होगी । जिससे तालाब में पानी भरा जा सकता है। प्रवेश पाइप को तालाब छिछले भाग में बनाना चाहिए।
प्रवेश पाइप के मुंह में जाली लगाए जिससे पानी के साथ कूड़ा-कचरा ना आ पाये। पाइप की मोटाई का व्यास 15cm. से 31cm. रखे। यदि आपका तालाब वर्षा के जल पर निर्भर करता है और वर्षा का जल अपने साथ मिट्टी लाता है तो तालाब में पानी के प्रवेश स्थान पर एक गड्ढा बना दे।
ताकि पानी उसमे रुक सके और बहकर लायी हुई मिट्टी उस गड्ढे में बैठ जाये । ऐसा करने पर तालाब में मिट्टी जमा नहीं होगी । गड्ढे में जमी हुई मिट्टी को आप समय होने पर साफ भी कर सकते है।
तालाब का पानी निकालने के लिए व्यवस्था-
तालाब से पानी को बाहर निकालने के लिए आपको सबसे पहले तल में एक निकासी पाइपकी व्यवस्था करनी होगी। इसमें जाली के साथ-साथ इसे बंद करने की भी व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि जरूरी होने के समय पानी का प्रयोग भी किया जा सके। और अनुपयोगी पानी के निकास को भी रोका जा सके।
पुराने तालाब की मरम्मत कैसे करे-
यदि आपके पास पुराना तालाब है तो आप उसकी मरम्मत करके उसमे मछली पालन के लिए योग्य बना सकते है। तालाब की साफ-सफाई कराए उसमे कोई पत्थर, कोई भी बड़ा पेड़ या पेड़-पौधो के तने इत्यादि नही होनी चाहिए। तालाब की गहराई ज्यादा ना हो तो आवश्यकता के अनुसार गहराई बनाए।
तालाब बनाने की तैयारी-
व्यवसायिक मछली पालन के लिए बड़ा तालाब बनवाना अच्छा होता है। यदि आप आधा एकड़ में तालाब बनवाना चाहते है तो आपके पास 76 डिसमिल जमीन होनी चाहिए जिसमे कि 26 डिसमिल जमीन बांध बनवाने में उपयोग हो जायेगा। तालाब को खुदवाते समय ऊपर की 8 से 10 इंच की मिट्टी को अलग रखवा दे। और इसके बाद जो मिट्टी निकलेगी उसे बांध बनाने में उपयोग करिए।
बांध को थोड़ा थोड़ा करके बनाए। एक दिन में 9 इंच ऊंचाई तक बांध के चारो तरफ से मिट्टी को डाले। फिर मिट्टी में पानी छिड़ककर पीट-पीट कर मिट्टी को बैठाए। इस तरह से पूरा बांध बना लेना है। बांध मजबूत बनेगी और तालाब के पानी के दबाव से टूटेगी भी नही।
जब तालाब पूरी तरह से बन जाए तब उसमे अलग से रखी हुई मिट्टी को समान रूप से फैला देना है। इसके बाद मिट्टी का PH चेक जरूर कर ले मिट्टी के अम्लीय होने की स्थिति में उसमे आवश्यकतानुसार चुना मिलाए। और एक बार हल चलवा दे जिससे चुना, मिट्टी में अच्छी तरह मिक्स हो जाए।
आधा एकड़ जमीन में 20 kg चुना का प्रयोग करना चाहिए। चुना की मात्रा, मिट्टी के PH और मिट्टी के उर्वरा शक्ति पर निर्भर करता है। यह काम आपका मई महीने तक में पूरा हो जाना चाहिए जिससे बरसात के मौसम में तालाब में पानी भर जाए। और आप मछली पालन कर पाए।
तालाब में खाद का प्रयोग क्यों करना चाहिए-
तालाब की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए खाद का प्रयोग करना जरूरी होता है। खाद का प्रयोग करने से मछली के प्राकृतिक भोजन की उपज अच्छी होती है। मछली का प्राकृतिक भोजन प्लवक है। नदी, तालाब, समुद्र, झील के पानी में तैरते हुए अति सूक्ष्म जीवों को ही प्लवक कहा जाता है। खाद, मिट्टी की गुणवत्ता को सुधार करने में महत्वपूर्ण होता है। चूंकि नए तालाब में मिट्टी भुरभुरी होती है तो खाद के प्रयोग से मिट्टी की संरचना में सुधार आ जाता है।
तालाब में कोन-कोन सी खाद उपयोग की जाती है
तालाब में सामान्य 2 खाद प्रयोग कि जाती है।
1. कार्बनिक खाद को
खाद हमको पदार्थो के सड़ने से मिलती है उदाहरण के लिए - मवेशियों खाद, सड़ेगले पत्तो के कंपोस्ट का खाद आदि।
2. अकार्बनिक खाद को
इसमें फास्फोरस और नाइट्रोजन जैसी खाद आती खाद आती है।
खाद का प्रयोग कब किया जाता है-
यदि मछली के लिए पर्याप्त रूप से pप्राकृतिक भोजन नहीं होगा तो आपको सबसे पहले खाद का उपयोग करना होगा। तालाब के पानी के रंग को भी देखकर पता कर सकते है। जब पानी का हरा-भूरा रंग है तो समझ जाए सब ठीक है।
मछली को तालाब में डालने के कुछ दिनो पहले खाद का प्रयोग किया जा सकता है।
हर महीने खाद डालना चाहिए।
पानी का रंग मटमैला सा होने लगे तो आप खाद का प्रयोग करे।
खाद का प्रयोग किस स्थिति होने पर ना करें-
तालाब में से बदबू आने पर खाद को तालाब मे डालना बंद करे करे।
यदि आपके तालाब की सतह पर काई का जमाव होने लग जाए तो आप समाज की अब आपको खाद प्रयोग करना बंद कर देना चाहिये।
तालाब में ऑक्सीजन की कमी दिखने पर प्रयोग बंद करे ।
मछलियों मे बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर खाद डालना बंद करे।
ठंड मे बाद का उपयोग करे अगर उपयोग करे तो कैसे करे-
मिट्टी में जो जैविक कार्बन की उपस्थिति स्थिति की जांच खाद का प्रयोग किया जाता है। मछली संचय से 15 या फिर 20 दिन पहले ही आपको कार्बनिक खाद, तालाब में डालने वाले खाद कुछ 25% भाग होगा । और बाकी बचे भाग 75 % खाद के दस बराबर भागों में बांटकर आपको हर महीने तालाब में खाद को डालना होगा है। तालाब के चारो ओर उपयोग करे।
आपको एक साथ खाद ना डालकर छोटी-छोटी मात्रा में 2 हफ्ते के अंतराल में खाद डालना चाहिये। कार्बनिक खाद डालने के कुल 4-5 दिन बाद ही रसायनिक खाद को डाले। खाद के रूप में आप गाय, मुर्गी, बैल और भैंस इत्यादि किसी भी तरह की खाद को तालाब में डाल सकते हो। और कुछ खादो की उर्वरता शक्ति बहुत ही ज्यादा होती है ऐसा हाने पर उन खादो प्रयोग ना के बराबर करे।
अगर आप भैस गोबर का प्रयोग करते हैं तो तालाब में उसका प्रयोग करने के लिए मनाही की जाती है क्योंकि गोबर के कारण पानी का रंग काला हो जाता है।जिसका नतीजा यह निकलता की पानी में ऑक्सीजन के उत्पादन में कमी आने लगती है। जब तालाब को तैयार किया जा रहा होता है तब गोबर के साथ पुआल का प्रयोग करे तो प्लवक का उत्पादन भी बहुत ज्यादा अच्छा होता है।
गोबर का उपयोग-
मछली के संचय करने से पहले शुरुआती समय मे आपको तालाब में कम से कम (1000 किलोग्राम/एकड़) गोबर डालना चाहिए। और हर महीने (400 किलोमीटर/एकड़) गोबर को डालते रहे। किसी भी एक कोने में डाल सकते हैं जिससे यह तालाब मे कुछ ही दिनों मे फैल जाएगा।
तालाब में (डी. ए. पी.) उपयोग
मिट्टी की जांच करवाए फॉस्फेट की कमी होने पर मछली संचय बाद शुरूआती के महीने में (10 किलो/एकड़) डी. ए. पी. डालते रहे। खाद को पानी के साथ घोलकर तालाब में छिड़काव करे। जिससे यह पानी में घुल जाए। यह खाद तालाब में बहुत ही धीरे-धीरे घुलता रहेगा।
तालाब में चुने का प्रयोग किस कारण से और क्यों किया जाता है।
गोबर को गलाने में भी बहुत मदद कारीगर होता है।
चुना पानी की क्षारीयता को बढ़ा देता है। साथ ही मिट्टी में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा देता है।
मछलियों को बीमारियों से बचाने मे भी बहुत ही मदद करता है।
चुना पानी को साफ करता है।
मछली बीज का संचय कैसे करे-
बीज का संचय करने से पहले आपको देखना होगा कि आप किस मछली का संचय करना चाहते है।आपको नही पता कि किस मछली का पालन करना आपके लिए सही होगा। तो देखते हैं आपके लिए किस मछली का संचय सही रहेगा।
जो मछलियां खाने में स्वादिष्ट हो।-
जो मछली की प्रजाति खाने में भी स्वादिष्ट हो।
जिन मछली का (जीरा) मार्केट में उपलब्ध हो।
तालाब घास उपलब्ध मात्रा ग्रास मछली को जरूर पाले।
जिस मछली की प्रजाति मांग मार्केट में ज्यादा हो।
बीज की मात्रा-
मछलियों के बीज कितनी मात्रा मे डाले यह तालाब की लंबाई ओर चौड़ाई पर निर्भर करता है। अगर आप तालाब में 1 इंच का बीज(जीरा) डाल रहे है तो (1/ हैक्टेयर) के तालाब में 5000 तक बीज को संचय किया जा सकता है और मिश्रित पालन में 10,000 तक बीज संचय किए जा सकते है।
आपको ज्यादा लाभ के लिए ज्यादा बीज डालने होंगे जिससे मछलियों का ज्यादा तादात पर उत्पादन किया जा सकता है। ज्यादा बीज डालने पर ज्यादा जगह की आवश्यकता नहीं होगी पर तालाब मे मछलियों के लिए खाने के कमी आने लग जायेगी और बाद मे जा कर जगह मे भी कमी आएगी।
तालाब में विभिन्न प्रजातियों का पालन-
तालाब में अनेक प्रकार की मछलियों की प्रजातियाँ का पालन कर सकते है आप जिस भी मछली की प्रजाति का पालन करना चाहते हो जिस तरीके से तालाब की सभी जगहों पर समान रूप से पालन कर सकते है होगा। 4-5 तरह की मछलियों का पालन तो आवश्यक रूप से जरूर करे। कीड़ों का चूर्ण, सरसों, चावल और मूँगफली के छिलके को मिक्स कर आहार के रूप मे मछलियों को दे सकते हैं निरंतर सुबह और शाम को समय-समय पर मछलियों को भोजन कराएं जिससे मछलियों की वृद्धि बहुत जल्दी होगी।
मछली पालन देशी तकनीक-
आप मेढ़क या फिर मेढ़क के बच्चे को तालाब से बाहर निकालने के लिए सबसे पहले कटहल का उपयोग करे। आपको कटहल को तालाब के चारो तरफ घुमाना होगा जिस तरीके से मेढ़क और उसके के बच्चे इसके पीछे आयेंगे जिससे तालाब से बाहर निकलते जायेंगे।
पानी का PH मान ज्यादा होने लगे तो इमली के पत्तो को तालाब में डाल दे। जिसके कारण पानी का PH मान कम होने लगेगा। जब तालाब के पानी का PH मान ठीक हो जाए तो आपको इसी स्थिति मे इमली को तालाब से निकाल दे।
जब आप तालाब में खाद का प्रयोग ज्यादा होने लगे तो इसी स्थिति मे मछलियां मरने की संभावना बढ़ती जाती है। इस लिए आपको खाद को एक कोने में रखना होगा किसके कारण यह पानी मे धीरे-धीरे घुलता रहेगा भोजन की पैदावार निरंतर बढ़ती जायेगी। जिसके कारण मछलियों के जो मरने का खतरा होता है वह ना के बराबर हो जाता है।
देशी दारू बनाने के लिए जो अनुपयोगी वस्तुएं बच जाती है उसका उपयोग आप मांगुर मछली के भोजन मे कर सकते है। पानी से दुर्गंध को दूर करने के लिए तालाब मे आपको जलकुंभी डालनी होगी। तालाब मे मौजूद के विषैले और रसायनिक तत्वों को भी खत्म कर देता है। आज के आर्टिकल मे बस इतना ही अगर आपको आर्टिकल अच्छा लगा तो इस आर्टिकल को शेयर जरूर करें।

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